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सोमवार, अक्टूबर 31
मैं आज भी अल्फ़ाज़ हूँ
मैं आज भी अल्फ़ाज़ हूँ तू लब्ज़ तो बन
मैं आज भी हूँ दर्द में. तू एहसास तो बन.
.
है आज भी हसरत तुझ संग जिन्दगी जीने की
तू पास तो आ . मेरी हसरत तो समझ .
धड़कनो को महसूस कर.. मेरा हाँथ तो थाम..मेरा सारथी तो बन ..
मैं आज भी अल्फाज हूँ तू लब्ज़ तो बन
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